अमेरिका की राजनीति में ईरान मुद्दे को लेकर बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान नीति पर अपने पूर्ववर्ती बराक ओबामा को कड़े शब्दों में घेरा और कई बड़े दावे किए। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ओबामा प्रशासन ने ईरान को भारी रकम देकर उसकी नीतियों को प्रभावित करने की कोशिश की, लेकिन इसके बावजूद तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर आगे बढ़ता रहा।
ट्रंप ने कहा कि ओबामा ने ईरान को 1.7 अरब डॉलर नकद दिए, जिसे अमेरिकी बैंकों से निकालकर विमान के जरिए भेजा गया। उनके मुताबिक, यह कदम ईरान की ‘वफादारी खरीदने’ की कोशिश थी, जो पूरी तरह नाकाम रही। उन्होंने यह भी दावा किया कि उस दौरान ईरान ने अमेरिकी नेतृत्व का मजाक उड़ाया और अपने परमाणु मिशन को जारी रखा।
‘न्यूक्लियर डील खत्म कर बड़ा खतरा टाला’
ट्रंप ने कहा कि ओबामा के कार्यकाल में हुई ईरान परमाणु डील से ईरान को बड़े स्तर पर परमाणु हथियारों की क्षमता मिल सकती थी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति बनने के बाद इस समझौते को खत्म कर दिया, जिससे एक बड़े खतरे को टाल दिया गया।
‘सुलेमानी को मार गिराना जरूरी फैसला था’
अपने पहले कार्यकाल का जिक्र करते हुए ट्रंप ने ईरानी जनरल कासेम सुलेमानी पर कार्रवाई को अहम कदम बताया। उन्होंने कहा कि सुलेमानी एक ‘खतरनाक लेकिन प्रभावशाली’ शख्स था, जो कई हिंसक गतिविधियों के पीछे था। ट्रंप के अनुसार, अगर सुलेमानी जिंदा होता तो ईरान आज कहीं ज्यादा मजबूत स्थिति में होता।
‘मेरे फैसलों से बदली मध्य-पूर्व की तस्वीर’
ट्रंप ने दावा किया कि अगर उन्होंने ईरान डील खत्म नहीं की होती, तो ईरान सालों पहले परमाणु हथियार हासिल कर चुका होता और वैश्विक हालात पूरी तरह अलग होते। उन्होंने यहां तक कहा कि उनके फैसलों के बिना मध्य-पूर्व और इजरायल का अस्तित्व भी खतरे में पड़ सकता था।
‘ईरान के हथियार कार्यक्रम पर सख्त कार्रवाई’
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ऐसे कदम उठाए, जो अन्य अमेरिकी राष्ट्रपति लेने से बचते रहे। उनका कहना था कि ईरान के जिन हथियारों को लेकर पहले संदेह था, उन्हें लेकर उनकी प्रशासन ने कार्रवाई की और उन्हें पूरी तरह खत्म करने का प्रयास किया। ट्रंप के मुताबिक, ईरान तेजी से परमाणु हथियारों की दौड़ में आगे बढ़ रहा था और उसे रोकने के लिए सख्त कदम उठाना जरूरी था।
ट्रंप ने अंत में कहा कि केवल बयान देने से कुछ नहीं होता, बल्कि सही समय पर ठोस कार्रवाई ही ऐसे खतरों को रोक सकती है। उन्होंने अपने फैसलों को इसी दिशा में उठाया गया कदम बताया।
